कभी कभी कुछ रातों को, जब सारी दुनिया सोती है
मेरी भीगी पलकों को माँ, बस तेरी जरुरत होती है
फिर माथे पर महसूस करूँ, तो तेरे हाथ मैं पाता हूँ
उन भीगी रातों में भी माँ, बस तेरे लिए मुस्काता हूँ
प्रेम से बड़ा कुछ भी नहीं, तेरी ममता की शिक्षा है
गर जी पाया इसे जीवन में, तो ये मेरी गुरु दीक्षा है
वो हो न सकें हर समय वहां, मैं जहाँ चलूँ गिरुं उठ के चलूँ
इसलिए तुझे भेजा है माँ, संघर्षों में सही राह चुनुं
तेरी दुआयों ने ही माँ, मेरी खुशियों को सींचा है
उस परमेश्वर का दर्ज़ा भी, तेरे दर्जे से नीचा है
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