यूं कितने दिनों के बाद, आए हो सपने में मेरे
तनिक बेठो बगल में, रात ही तो है चले जाना सवेरे
कितने दिन हुए ना, न दिया तुमने अपनी बाहों का सिराहना
क्या नींद आई होगी मुझे, बड़ा हो गया हूँ तुमने तो यही माना
झूठ नहीं बोलूँगा तुमसे, दिन में याद नहीं करता था
पर हर रात हमारे आँगन की, हर आहट पर नज़र रखता था
आज बताना होगा तुमको, ऐसी क्या मजबूरी थी
क्यों बिल्कुल अकेला छोड़ दिया, जब मुझको बहुत जरुरत थी
गुस्सा तो है मुझको, पर जाने दो अब छोड़ो भी
मैं अब चुप हो जाता हूँ, तुम अपनी चुप्पी तोड़ो भी
नहीं आज नहीं भाषण दूंगा, तू अपना मन हल्का कर ले
जितना गुस्सा है अपने पर, आज जी भर कर मुझ पर कर ले
कहता है अकेला छोड़ दिया. तू मुझसे मिलने आया भी
मीलों नाप लिए तूने, कभी ख़ुद के अन्दर झाँका भी
कुछ भी कर जाऊंगा मैं, तू ही तो बोला करता है
क्षण भर को कांटें चुभे नहीं, अब इतना हल्ला करता है
सोना बनने से पहले, सोने को तपना पड़ता है
पत्थर का कोई मोल नहीं, हीरे को कटना पड़ता है
माना की पथ कंटीला है, पर तुझमे मैं भी तो हूँ
कर आंखें बंद और बढ जा बस, बाकी का सब मैं देखता हूँ
वो प्यारे दिन भी बीत गए, तो क्या ये दिन बच जायेंगे
हाथ पकड़ के रखना बस, ये छूमंतर हो जायेंगे
चल मैं बाहें करता हूँ, फ़िर दोनों सो जाते हैं
सुबह काम पे भी तो जाना है, तुझको भी और मुझको भी

To Love another person is to see the Face of God…