तू कहता है सच्चाई हमेशा जीतती है,
क्या सच में जीतती है ?
पर दिखती तो हार है |
हर धोखे के आगे सारा विश्वास चूर चूर हो जाता है,
पर तेरे नयनों में एक अश्रु नहीं आता है |
तू बता कैसे जियूँ तेरी दुनिया में, इंतज़ार होता नहीं अब और तू आता नहीं है |
तू कहता है देवियाँ हर घर में पूजित हैं,
क्या सच में पूजित हैं ?
पर होता तो अत्याचार है |
पुत्री भगिनी भार्या के आने से पहले, माँ का गर्भ गिरा दिया जाता है,
पर तेरे नयनों में एक अश्रु नहीं आता है |
तू बता कैसे जियूँ तेरी दुनिया में, इंतज़ार होता नहीं अब और तू आता नहीं है|
तू कहता है जोडियाँ स्वर्ग में बनती हैं,
क्या सच में बनती हैं ?
पर दिखता तो व्यापार है |
बोलियाँ लगती हैं और सौदा तय कर दिया जाता है,
पर तेरे नयनों में एक अश्रु नहीं आता है |
तू बता कैसे जियूँ तेरी दुनिया में, इंतज़ार होता नहीं अब और तू आता नहीं है |
तू कहता है हृदय के प्रेम में तू बसता है,
क्या सच में बसता है ?
पर तू दिखता तो लाचार है |
हृदय टूटते हैं और तेरा अस्तित्व बिखर जाता है,
पर तेरे नयनों में एक अश्रु नहीं आता है |
तू बता कैसे जियूँ तेरी दुनिया में, इंतज़ार होता नहीं अब और तू आता नहीं है |
तू कहता है हर जीव में ओम का अंश है ,
क्या सच में “ओमांश” है ?
पर दिखता तो अंहकार है |
धन जाति धर्म के नाम पर इंसान लकीरें खींचता जाता है,
पर तेरे नयनों में एक अश्रु नहीं आता है |
तू बता कैसे जियूँ तेरी दुनिया में, इंतज़ार होता नहीं अब और तू आता नहीं है |
आज सुन ले जग के पालनहार, त्याग दे अपना पाषाण अवतार,
बह जाने दे अश्रु की धार, अब आ जा और फ़िर से गले लगा ले यार |
बहुत अच्छी लगी आपकी कविता….. अन्तिम पक्तिंयो ने कविता को एक नया ही रूप दिया है ।
भगवान से झगडने वाले कई लिखने वाले होते है पर भगवान को दोस्त यार कह कर गले लगाने वाले को पहली बार पढा