आज मेरे सपने में स्वयं आए भगवान |
बोले वत्स , छोड़ दे चिन्ता छोड़ दे शर्म,
कर ले याद पुराने कर्म,
फ़िर मांग तू एक, हाँ सिर्फ़ एक वरदान |
आज मेरे सपने में स्वयं आए भगवान |
मैंने कहा की भगवन, कहते हो की चिन्तामुक्त हो जायुं,
पर ये सम्भव है कैसे,
मैं तो थक चुका हूँ बड़ी बड़ी चिंतायों [...]
Archive for August, 2007
nAMe
Posted in Uncategorized on August 22, 2007 | Leave a Comment »
रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा,
एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं .
तुमने हमें पत्थर का दिल कह तो दिया,
पत्थर पर लिखोगे नाम मिटेगा नहीं .